चुन चुन कर शिद्दत से इस कदर परोस तो रहे हो वक्त की आग में हसरतों की लकड़ियाँ, साँसों से हवा दे रहे हो, जब आएगा ताप तौबा कर सकोगे?
No comments:
Post a Comment