गृह युद्ध में
मार
चौराहे पर
उल्टा लटकाए से
लगे
पहले पहल
दूर से
वो सारे
मुझे ।
फिर
जब
याद आया
नहीं हैं हालात
बुरे
इस कदर
मुल्क ए आज़ाद
अभी,
जाकर
देखा
गौर से
दोबारा
तो
दहशत ओ
दिल को
तसल्ली हुई,
निकले वो
सारे
चौराहे पर
उल्टा टंगे
धोकर
सूखते
धोबी के
दस बीस
कपड़े।
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