साँसों की तितलियाँ
Sunday, March 2, 2014
उधर से
गुज़रूँगा उधर से, मिलता जाऊँगा, तुझे ऐ खुदी
अभी तो हूँ भटकता यहाँ, दूर, तनहा, अकेला ।
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