मचा खलबली बेकार की दस जहान ता उम्र अब जो लेटे हो इहाँ लम्बे सुकून में ये तो कहो अब सम्भालेगा कौन वो डसते सन्नाटे जो उहाँ छोड़ आये हो!
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