साँसों की तितलियाँ
Wednesday, March 5, 2014
पीछे
क्या देखते हो मुड़ मुड़कर जहाँ से आये हो
आँखें झाँकती हैं दरीचों से, दरवाज़ों पे चिटखनियाँ हैं
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