बच्चों के ज़हन के इंजन में कौतुहल के कोयले झौंकता गया।
ज्ञान की भाप घपाघप उठ समझ के पहियों को बल से घुमा, नियती की पटरी पर, जीवन की रेल, खींच ले गई भविष्य के स्टेशन, मारती ज़ोर ज़ोर से उत्साह की कूक।
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