उड़ी है
तितली
जो कहीं,
तूफ़ान में
फूँक की
कमी है,
रेत के
गुबार में
चुटकी सी
कम उड़ी है।
सूरज से
चलकर
पहुँची है
गुलज़ार ओ
गुल की
पंखुड़ी पर
धूप कुछ
कम,
कुछ तो
हुई है
तब्दीली*
जहाँ में,
कहीं कोई
तितली सी
उड़ी है।
बरसी है
एक बूंद
किसी और कण,
दरिया के रुख में
आस सी
मुड़ी है,
समन्दर हुआ है
खाली
न आनें से
जिस बूंद के,
कहीं और
जा जुड़ी है।
हैरान हो
ढूँढती हैं
मुड़ मुड़ के
बादबानी**
वो कश्तियाँ
जिसे,
हवा के झोंके
पे बन के शिकन
कहीं उड़ी है,
ज़मीनों आसमानो समन्दर
में जो लड़ी सी है
उसी को छेड़ने
कहीं
कोई
तितली सी
उड़ी है।
*change
**पाल वाली नौका
तितली
जो कहीं,
तूफ़ान में
फूँक की
कमी है,
रेत के
गुबार में
चुटकी सी
कम उड़ी है।
सूरज से
चलकर
पहुँची है
गुलज़ार ओ
गुल की
पंखुड़ी पर
धूप कुछ
कम,
कुछ तो
हुई है
तब्दीली*
जहाँ में,
कहीं कोई
तितली सी
उड़ी है।
बरसी है
एक बूंद
किसी और कण,
दरिया के रुख में
आस सी
मुड़ी है,
समन्दर हुआ है
खाली
न आनें से
जिस बूंद के,
कहीं और
जा जुड़ी है।
हैरान हो
ढूँढती हैं
मुड़ मुड़ के
बादबानी**
वो कश्तियाँ
जिसे,
हवा के झोंके
पे बन के शिकन
कहीं उड़ी है,
ज़मीनों आसमानो समन्दर
में जो लड़ी सी है
उसी को छेड़ने
कहीं
कोई
तितली सी
उड़ी है।
*change
**पाल वाली नौका
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