Monday, March 10, 2014

शहर

तोड़ के
फ़िर से
पड़ेंगे
बनाने
शहर सारे
आपको,
बना रहे हो
जो
मुसलसल
बेतरतीब,
बाशिंदे*
तो
बहरहाल
मरके
नए
हो जायेंगे।

*रहनें वाले

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