ये गले में
क्या है
बाँसुरी सी
बजती नहीं
जो
बोलती है।
कौन
रखता है
किन सुराखों पर
उंगलियाँ,
किसके
इशारे
चलाता है।
धौंकनी सा
फूँकता है,
बजाता है
कौन,
कौन सी
धुन,
किसको
सुनाता है।
फिर
क्यों
होनें पर
ख़त्म
अपना ही
गीत
इसे जलाता है
कौन सा राज़
छुपाता है?
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