लगते थे
दोनों
ज़हीन
सुशील।
नौजवान थे
चेहरे पर था
नूर
काफ़ी।
लगते थे
दोनों
पढ़े लिखे
होनहार
मेहनती
खुद्दार,
उतावले
ज़िन्दगी में
कुछ
कर गुजरने को।
चल रहे थे
साथ साथ
वो
एक दुसरे से
बस कुछ ही
आगे
पीछे।
पहनीं
होती
अगर
किसी एक नें भी
वर्दी
तो
जान जाता
कौन था
किसको
ले जाता
पहना
हथकड़ी।
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