साँसों की तितलियाँ
Tuesday, July 1, 2014
नज़र
यूँ
न देखो
हर शै को
प्यार से,
कविता में
बदल
जाएगी,
सम्भालो
अपनी
निडर
नज़र,
नज़ारे
बदल
जाएगी ।
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