साँसों की तितलियाँ
Tuesday, July 1, 2014
कीमत
भूलने
को हूँ
तैयार
ज़िन्दगी
की कीमत
जो
मैंने दी,
चार
दिन तो
मगर
चले
सही
सलामत,
मुरम्मत
से
पहले।
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