साँसों की तितलियाँ
Wednesday, February 25, 2026
सबब
शायद
इसी
सबब
से
उठता
है
आये
दिन
शहर
में
कोई
न
कोई
,
जायें
बीस
पचास
साथ
देखने
अंतिम
सच्चाई
,
याद
रहे।
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