साँसों की तितलियाँ
Wednesday, July 24, 2013
कारोबार
कौन मिलता है
कभी
कहीं
किसी को
गोया कारोबार के सिवा
लौटाना होगा
कभी कुछ लिया हुआ,
लेना होगा
कहीं कुछ
लौटाने के लिये।
बेरुख़ी
कर्ज़ न सही
एहसान ही सही
कुछ तो लिल्लाह दीजिये
इंकार ही सही।
वफ़ा न हो मुमकिन
जफ़ा नामंज़ूर
बेरुख़ी हो आसान
बेरुख़ी ही सही
नीयत
बला की ढूँढती है
नीयत बला को -
टालने वाली
उतारने वाली
रूठने वाली
गिटार
कौन सी गिटार खरीदूँ
जो बजानी आसान हो
जल्दी आ जाये
फिर सोचता हूँ
जो अंदर बजती है
बज रही है
बेहतर है
अच्छी है
Saturday, June 29, 2013
बारिश
बंद खिड़की पर
बाहर से पड़ती
बारिश
जब शीशे को
ज़ोर ज़ोर से धोती है,
अंदर
सूने
बंद कमरे में
अकेले
सूखे
बैठे मुझको
यादों से भिगोती है.
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)