मज़मून
कोरा
नहीं हूँ मैं ।
अकेला
नहीं हूँ मैं ।
रगों की वादियों
उमड़ते
लाल दरिया
में हैं
बहती
हस्ताक्षरों
की
हज़ारों कश्तियाँ
पूर्वजों की
मेरे ।
मज़मून
कोरा
नहीं हूँ मैं ।
अकेला
नहीं हूँ मैं ।
रगों की वादियों
उमड़ते
लाल दरिया
में हैं
बहती
हस्ताक्षरों
की
हज़ारों कश्तियाँ
पूर्वजों की
मेरे ।
ऊपर
जो हो
तिरछी टोपी
कसी पेटी
खाकी वर्दी,
तो
नीचे
सख्त़ जूतों
को
चमकाने
पॉलिश करने
के पैसे
मोची
लेता
कैसे?
सत्ता
के पैरों
पर हाथ लगा
बोहनी
की उसनें |
ठहर
यहीं
तू
ज़िंदगी,
आऊँगा
तुम्हें
लेने
पाने
मिलने
जीने,
मरने से
पहले।
अभी
ज़रा
ठहर,
पहले
भटक लूँ
ढूँढने
तुम्हें
हिरन सा
हर दिशा
उठाए
कोतुहल की
नाभी ।
गर
मेरी तरह
हर
ज़र्रा
भी है
जागता
सोचता
देखता
सब कुछ,
और
ख़ुद को भी,
ये
किसनें,
कहाँ से
लाकर
रख छोड़ी है
दुनिया
सारी
कहाँ
क्यों
भरोसे
किसके?
हो न हो
यकीनन
बैठा
होगा
कहीं
यहीं
आसपास
बजाता बाँसुरी,
अपनीं
हम भेड़ों
को
छोड़ चरता
बेपरवाह...
पसीनें
की
कमाई
से भी
क्यों
उठती है
चोरी
की सी
गंध?
ये
किसके
डर का
पसीना है,
किसके
पसीनें का
डर !