Tuesday, December 2, 2014

तरीका

अपने
तरीके से
बहलाना है
ख़ुदा
तो
इजाज़त है
तुम्हें,

पर
ये तो
न कहो
कि
तुम्हारा
ख़ुदा
जुदा है!

बात

न ब्याह
मुझको
मेरी माई,
मेरी
बात
सुन,

सम्हालने दे
ताउम्र
यूहीं
तेरे न हुए
बेटे की तरह
तेरी
ये दुकान,
स्वावलम्बी
आज़ाद
खुश
रहने दे।

नशा

धरती को
नशा था
कि
उसे ही
देखता है
लुकता छिपता
घूमता
सूरज,

सूरज की
बारहा
ज़िम्मेदारियाँ
बहुत थीं।

Monday, December 1, 2014

कुछ और

यकीन
कम कर,
शक़
कुछ और,

दिखते को
तस्लीम कर,
खोज
कुछ
और।

उम्मीद

मेरी
फ़ानियत
की न
कायनात को
सज़ा देना,

उसे ज़िंदा,
मेरी उम्मीद
बरकरार
रखना।