भीतर के
कुत्ते को
घुमाने
निकला हूँ,
मेरी थी
उदासी,
उसकी
दिनचर्या थी!
वो कौन सा था गाना
जो तुमने सुना था
लगा
कानों में इयर फ़ोन
मोबाइल से अपने?
क्या थे बोल उसके
किस बारे में था?
क्या थी धुन उसकी
ऐसी क्या कशिश थी
जो
उसे ही
तुमने
बार बार
यूँ सुना था?
किस कशमकश में
उलझाये
उकसाये था
तुमको,
किस हिम्मत की
तेरे भीतर की बावड़ी
भरे था?
कौन सा सुकून
कैसा दर्द
पिलाता था
कानों से,
वो कौन सा था गाना
जो बारबार
तुमने सुना था
लगा
कानों में इयर फ़ोन
मोबाइल से अपने
आध घण्टा
कूदने से पहले
कन्दरौर के
उसी पुल से
सतलुज में,
ऐ कुल्लू की लड़की!