Sunday, July 19, 2015

उदासी

भीतर के
कुत्ते को
घुमाने
निकला हूँ,

मेरी थी
उदासी,
उसकी
दिनचर्या थी!

Monday, July 13, 2015

ख़्याल

रख
अपने जिस्म का
ख़्याल
अभी
कुछ और,

रूह की
तमन्नाएँ हैं
बाक़ी,
इंतज़ार
कुछ और...

Sunday, July 12, 2015

जूता

चमड़े
का जूता
मेरी
कविता,

भावनाओं
की
खाल
से बना...

गाना

वो कौन सा था गाना
जो तुमने सुना था
लगा
कानों में इयर फ़ोन
मोबाइल से अपने?

क्या थे बोल उसके
किस बारे में था?

क्या थी धुन उसकी
ऐसी क्या कशिश थी
जो
उसे ही
तुमने
बार बार
यूँ सुना था?

किस कशमकश में
उलझाये
उकसाये था
तुमको,
किस हिम्मत की
तेरे भीतर की बावड़ी
भरे था?

कौन सा सुकून
कैसा दर्द
पिलाता था
कानों से,
वो कौन सा था गाना
जो बारबार
तुमने सुना था
लगा
कानों में इयर फ़ोन
मोबाइल से अपने
आध घण्टा
कूदने से पहले
कन्दरौर के
उसी पुल से
सतलुज में,
ऐ कुल्लू की लड़की!

Tuesday, July 7, 2015

सीधा

न बारह
न एक
न दो
न चार,

मेरी आँख
क्या लगी
कि
कुदरत नें
सीधा
सुबह के
पाँच
बजा दिए!