रोके जाने पर
किस किस
मुसीबत से
कैसे कैसे
निपटनें की
तैयारी की थी
मैंने,
इस मोड़ पर
अब मत दे
यूँ
आसान
बदले रास्ते,
कि संघर्ष का
लुत्फ़ न आये।
रोके जाने पर
किस किस
मुसीबत से
कैसे कैसे
निपटनें की
तैयारी की थी
मैंने,
इस मोड़ पर
अब मत दे
यूँ
आसान
बदले रास्ते,
कि संघर्ष का
लुत्फ़ न आये।
कौन सा
डर था
आपको
जो आप
इतनी दूर जाकर
इतनी देर से
रुके!
होनी तो
कब से
देती थी
आवाज़ें
पीछे से
कि गलत राह पर हैं
आप!
आसमान से
चमकाकर
बिजलियाँ,
खींचता है
ख़ुदा
सेल्फ़ियाँ,
ख़ुद ही ख़ुद है
तस्वीरों में
और
दिखता भी नहीं!
चलता फिरता
एडिडास का
इश्तेहार था
वो,
टी शर्ट की
छाती पर
शान से
मुफ़्त उठाये था
इम्पॉसिबल इज़ नथिंग
का
अपने अस्तित्व पर
इम्पॉसिबल
लॉट ऑफ़ थिंग्स का
भारी बोझ.