Sunday, March 6, 2016

कौन

करता हूँ
जब भी
ख़ुद से
कोई बात
तो सोचता हूँ,

किससे
हूँ कर रहा
और कौन हूँ मैं!

Saturday, March 5, 2016

कहे

कूड़ेदान में
कब तक
रहे कोई,

क्यों न हो
साफ़,
कहे
शहर कोई।

मिली

रह चला है
इस शहर से बाहर
देखने को
क्या कुछ
जाते जाते,

पा कर भी
कहाँ मिली
दुनिया मुझे!

Tuesday, March 1, 2016

ऐतबार

वो
लौट आये
इत्मिनान हमें,

हम
होते हैं रुख़सत
ऐतबार उन्हें।

ठहर

कुछ और है
तेरी
उदासी का सबब,

होने दे
वाज़े,
ठहर,
अभी उदास न हो।