तुझमें
नहीं
कोई
रूचि विशेष
मेरी,
वो जो
तेरी
बात है
सुना दे
फिर
ज़रा।
है सख़्त
आवश्यकता
करें रक्षा
कुलीन आतताई
समाज की
बेक़ाबू आक्राँताओं से,
जब तक
जुटाये हिम्मत
भद्रलोक,
यदि।
हुण कौण
लावे लंगर
शामशानां च,
जगा छकावे,
मोयाँ नूँ
बिठावे इको पंगत,
केड़ी अग्गे साड़े
पछाण मिटावे!