Saturday, April 2, 2016

बात

तुझमें
नहीं
कोई
रूचि विशेष
मेरी,

वो जो
तेरी
बात है
सुना दे
फिर
ज़रा।

Friday, April 1, 2016

फिसलन

असफल हो
तो कोई
मुक्ति की
राह पकड़े,

सफलता की
फिसलन में
कोई
कैसे सम्भले!

आवश्यकता

है सख़्त
आवश्यकता
करें रक्षा
कुलीन आतताई
समाज की
बेक़ाबू आक्राँताओं से,

जब तक
जुटाये हिम्मत
भद्रलोक,
यदि।

लंगर

हुण कौण
लावे लंगर
शामशानां च,
जगा छकावे,

मोयाँ नूँ
बिठावे इको पंगत,
केड़ी अग्गे साड़े
पछाण मिटावे!

पहचान

रूह को
याद नहीं
जिस्म अपना,
खड़ी है
मोक्ष के द्वार
पहचान ढूँढती।