दरारों से हमनें जो अक्स देखा वो तेरा ही था,
दर ओ दीवार कोई और थे, पता तेरा ही था।
यूँ तो दूर हूँ आप से, करीब तीन सौ बरस,
शब्द आपके गूँजते हैं जब वजूद में मेरे बारम्बार झाँकता हूँ भीतर मिलने को तरस।
अभी कुछ दिन निर्माण के और,
मेरे परिवार के निर्वाण को और...
तेरा तोता मामा तो पास हो गया कामगार के बच्चे!
डिग्रियों की दुनिया में फेल होने के लिए ही सही तू पढ़ने कब जायेगा?
मेरी तरह यतीम ओ मुफ़लिस निकली, दुनिया की दुल्हन पौ फटते बाज़ार ओ रौनक़ की अमीरन निकली।