Saturday, February 11, 2017

गूगल मैप्स

ज़ूम कर करके देखता हूँ
उस शहर का गूगल मैप,

हो हो रोमाँचित
देख उभरती
धीरे धीरे
हर वो बिसरी सड़क
चिंगारी है जिसका नाम
मेरी यादों के बारूद को!

आँखें फाड़
चिपका हूँ
लैपटॉप स्क्रीन से,
शायद दिख जाए
और ज़ूम की गहराइयों में
वो गली
वो नुक्कड़
वो घर
वो घर के बाहर का चबूतरा,
उस चबूतरे पर बैठी
ख़्यालों में मेरी राह देखती
मेरी वही
मुस्कुराती
बूढ़ी
अमर नानी!

Tuesday, February 7, 2017

स्याल दी सवेर

कदे कदे
सूरज
दिने वी सौं जाँदा,
जदों बद्दलाँ दी बुक्कल नसीब हुन्दी,

विच विच झाक
किनारेयाँ चों
जिवें स्याल दी चढ़दी सवेर
माँ दी गोद च मस्तेया
जागदा, पर फेर वी नींदेया
जवाक कोई,
झट खिच
ताण लैंदा
आपणे चंगे नसीब दी खेसी,

कदे कदे
छड
नाशुक्रे ज़माने नूँ
यतीम,

सूरज
चड़नेयों रह जाँदा!

Monday, February 6, 2017

बीज

इतना डरा दोगे
अर्थ के बीज को
तो कैसे फूटेगा?

कैसे बनेगा
कल्पवृक्ष,
पाश टूटेगा...

तूफ़ान

रात के समन्दर में
विचारों की लहरों पर
सोच की नाव
जब घिर गई
बेचैनी के तूफ़ान में,

रौशनी की प्रार्थना में
डाला जो क़िताब का लंगर
लगा जैसे पालने में हूँ मैं,
लगा जैसे सुक़ून की नींद है आती!

Friday, February 3, 2017

मोमबत्ती

हवा के सीने से
लेकर
दो हाथ भर
ऑक्सीजन
उधार,
एक मोमबत्ती जला लूँ,

इस
सुनसान ऊँचाई पर
अकेले में
ख़्यालों की
महफ़िल
सजा लूँ!