Saturday, March 4, 2017

समन्दर

मोतियों के समन्दर में
रखना आँसू सम्भाल के,
खो जाओ जो किसी रोज़
तो इनमें ही मिलोगे!

Friday, March 3, 2017

क़ीमत

मत कर
ख़ुद को
लहू लुहान
गर इस कदर
आरज़ू है तेरी,

एक सबक और
सीख ले,
क़ीमत दे दे।

तौबा

एक बार
डस्वाकर
करूँ
सर्प से
तौबा,

न उसे
रहे मलाल
न मुझे रहे!

Thursday, March 2, 2017

क्राँति

क्राँति
को पता है
कि उसे
कब क्यों कहाँ
कैसे होना है,

बरस के होना है
या रिस के होना है!

अब तो

इन्सां,
अब तो
टाँगे काटने की सोच,

न तो
और चादर बढ़ाने की
कुव्वत है तेरी,
न पसारी तमन्नाओं
के सिमटने के इम्कानात।