मोतियों के समन्दर में रखना आँसू सम्भाल के, खो जाओ जो किसी रोज़ तो इनमें ही मिलोगे!
मत कर ख़ुद को लहू लुहान गर इस कदर आरज़ू है तेरी,
एक सबक और सीख ले, क़ीमत दे दे।
एक बार डस्वाकर करूँ सर्प से तौबा,
न उसे रहे मलाल न मुझे रहे!
क्राँति को पता है कि उसे कब क्यों कहाँ कैसे होना है,
बरस के होना है या रिस के होना है!
इन्सां, अब तो टाँगे काटने की सोच,
न तो और चादर बढ़ाने की कुव्वत है तेरी, न पसारी तमन्नाओं के सिमटने के इम्कानात।