Saturday, April 15, 2017

गुब्बारे

उड़ने दूँ
आसमान में,
मैं चलूँ,

कब तक
बच्चों के गुब्बारों को
पेड़ का तना बन
पकड़े रखूँ!

Friday, April 7, 2017

शेल्फ़

मेरी  ग़ैर मौजूदगी में भी
मिल लेते हैं
मुझसे
घर आने वाले,

क्या क्या बता देती हैं उन्हें
मेरे बारे
मेरे कन्धों की शेल्फ़ पर पड़ी
किताबें मेरी...

टंकियाँ

उड़ती
पानी की टंकियाँ
ये रहमतों के बादल,

औंधी पड़ी
बिना पैंदे की
ये इन्सां की बाल्टियाँ...

Tuesday, April 4, 2017

ख़्याल

मत पूछ
अपने बारे में
मेरे ख़्याल,

ख़ुद की बाबत भी
बेबाक़ ओ
आला नक़ीद हूँ मैं।

Sunday, April 2, 2017

पति

उप
कुल
पतियों
की सति प्रथा पर
हतप्रभ
क्षुब्ध है
आज के हर राममोहन की रूह,
एक महाराजा की ताजपोशी
के घटनाक्रम पर
शर्मसार है
लोकतन्त्र के मत का
हर राजा।