सपनों की दुनिया
कहीं यही तो नहीं?
आँख मिचौनी खेलती
मुखौटे के पीछे तो नहीं!
टी वी की प्लेट में
मस्तिष्क के डाइनिंग टेबल पर
आखों के हाथ
झट परोस देता है
सोशल मीडिया का
नौकर
कलेजा मूँह को लाती ख़बरें
ठीक भोजन के वक़्त...
ज़मीन से
उसने
कोई सरोकार न रखा,
सिवाय
उस मोटे पेड़ की जड़ों का
जिसके तने पर
बनाया उसने
वो ट्री हाउस
स्वर्ग के आधे रास्ते,
लिए साथ
यक्ष के अंतिम सवाल वाला
साथी।