मोटर से ही उठा कर
ज़रा गिरा दो
ऊपर से
झरने की तरह पानी,
किसी तरह तो
उजड़ी जन्नत का
ये एहसास मिटे।
मोटर से ही उठा कर
ज़रा गिरा दो
ऊपर से
झरने की तरह पानी,
किसी तरह तो
उजड़ी जन्नत का
ये एहसास मिटे।
साधनों की तरह
खुशी की शर्तें भी
बड़ी कम थीं
ग़रीब के पास,
कम कोशिशों के बावजूद
वो कैसे ज़्यादा खुश था?
भगदड़ मच जाती
फैल जाती
अफ़रा तफ़री,
भागते इधर उधर
सब लोग
बचाने जान,
निकल आते
तुरत रक्षा बल के
सशस्त्र जवान
संभालने मोर्चा
मर मिटने को तैयार,
गर न होता
ये सायरन
सरकारी कर्मचारियों की
छुट्टी का
पाँच बजे वाला हूटर,
एमरजेंसी का होता...
मेरी सूरत पर थी
ज़माने की नज़र,
सीरत महफ़ूज़ थी,
तेरी खुदाई से ढकीं मैंने
बेशक़ीमती
परतें तेरे मानूस की...