हर कोई तुझे छूने का प्रयास करेगा,
तुझ से विशेष रिश्ते का जतन, हे ईश्वर! अनायास करेगा।
जिव्हा पर नंगे पाँव चल कण्ठ से लिपट उदर में उतरे अमृत ने पूछा जब रूह से कहाँ है वो,
अमृतपान की प्यासी की बाहर से आवाज़ आई "मंजी देह की तलाश में"
भभकते सूरजों झूमती हवाओं के समन्दरों दृढ़ संकल्प पर्बतों का प्रावधान है ऐ फूल तेरे लिए,
मुस्कुरा दे खिल कर ज़रा, नहीं और तो शुक्रिया के लिए...
यूँ ही कैसे ले लेता जान तीर उनका ज़हर बुझा,
एक सीना भी तो दरकार था जो मैंने दिया नहीं...
बड़ी नफ़ासत से सम्भल सम्भल कर निज़ाम ने थी जाने दी उनकी जान,
इतने मकबूल थे वो कि उन्हें मरने की इजाज़त न थी।