Thursday, January 18, 2018

पटरियाँ

छुपा कर
रखे थे जो
शहर के
शर्मिंदा हिस्से
सड़कों की
पैनी नज़रों से
आपने,

रेल की पटड़ियों के
किनारे
ख़ुद को ढकते
लावारिस मिले।

Saturday, January 13, 2018

ज़िद

क़िस्मत की
वो ज़िद
कि यूँ ही रहेगी,

और हमारा
वो सरकश*              (defiant)
राद ए अमल**         (reaction)

फ़ुर्सत में
वो हिमाकतें
दोनों को
याद रहेंगी...

Wednesday, January 10, 2018

पहचान

पहचान
बदल बदल कर
आता रहा
वो
मेरे सामने,

पहचान कर भी
मैंने
खुद ही को
पहचानने
न दिया।

Monday, January 8, 2018

पुष्प

पुष्प बन
पुतलियों में
खिली है
तेरी याद,

दिल की
गीली मिट्टी पर
तेरे नंगे पावों की
छाप आई है।

Friday, January 5, 2018

प्रयास

हर कोई
तुझे छूने का
प्रयास करेगा,

तुझ से
विशेष रिश्ते का
जतन,
हे ईश्वर!
अनायास करेगा।