होगा ज़रूर
वो
किसी
सूखी नदी का
भीगने को तरसा
चकमक
पत्थर,
गुमनामी की हवाओं में
उड़ने से रोके है
मेज़ पर पड़े
जज़्बातों के समंदर भरे
सूखे काग़ज़।
दसवीं
पास हूँ,
दुनिया वालो
कभी
पूछ तो लो,
है
सच में
मेरे पास
असली का
जीवन से कीमती
वो सर्टिफिकेट,
एक बार सही
देख तो लो.