नुक़सान
हो हो के वी
क्यों
फ़ायदा
हो रेहै?
ए
की
हो रेहै,
ए
क्यों
हो रेहै!
सोच
रेहाँ
ऐ जिस्म
कद तक
चलेगा?
सोच
रेहाँ
इस तों
बाहर
मैनूँ
किवें
लगेगा?
सोच
रेहाँ
फ़ेर
की
सोच्या कराँगा?
सोच
रेहाँ
फ़ेर
सोच
पाँवाँगा
वी या नहीं?
इस
जिल्द
से निकले
सफ़े
अब
कहाँ होंगे?
ख़ाली
दवातों
सूख़ी कलमों
के हर्फ़ उठाये
कहाँ उड़े
गले
गुमे
दबे होंगे!