Monday, November 30, 2015

संयम

यूँ तो
बहुत
संयम था
उसमें,

वक़्त पड़े
संयम खोलने का
संयम नहीं था!

Sunday, November 29, 2015

ज़िंदा

आपके
इन्तक़ाल की
ख़बर
मुझे
बहुत देर से
मिली,

मरने के बाद भी
आप
एक अर्सा
थे
ज़िंदा!

नसीब

अपनी अपनी
कम्फर्ट ज़ोन में
जी
रही है
दुनिया,

कम से कम
इतनी ज़िंदगी
हर किसी को
नसीब है!

ऊन

उलझी हुई
ऊन है
ये दुनिया
का घोसला,

सुलझाओगे
इसे
तो
कहाँ
जाओगे!

Friday, November 27, 2015

हौसला

हमें
दबाकर
चलो
उन्हें
हौसला तो है,

गुमराह
हो कर भी
कोई
मन्ज़िल ओ मक़सूद
तो है!