यूँ तो बहुत संयम था उसमें,
वक़्त पड़े संयम खोलने का संयम नहीं था!
आपके इन्तक़ाल की ख़बर मुझे बहुत देर से मिली,
मरने के बाद भी आप एक अर्सा थे ज़िंदा!
अपनी अपनी कम्फर्ट ज़ोन में जी रही है दुनिया,
कम से कम इतनी ज़िंदगी हर किसी को नसीब है!
उलझी हुई ऊन है ये दुनिया का घोसला,
सुलझाओगे इसे तो कहाँ जाओगे!
हमें दबाकर चलो उन्हें हौसला तो है,
गुमराह हो कर भी कोई मन्ज़िल ओ मक़सूद तो है!