Sunday, January 31, 2016

जीवनियाँ

आख़िर तक
भुला कर
करती है इंतज़ार दुनिया
सुन्दर जीवनियों को
समेट
दीवारों पर सजा
टाँगने की,
जब तक रहे
बीच में
औरों से रहे...

बेताब

तूँ
कदम ताँ चुक बन्देया,

राह बेताब ए
वदण नूँ।

Saturday, January 30, 2016

गवाह

यक़ीनन नहीं हैं
आप
गवाह
गाँधी की हत्या के
इस बरस भी,
आपके वजूद की पीठ थी
जब सायरन बजा था।

सीमेंट

सीमेंट नाल ना पोत देओ
सारी धरती,

थोड़ा
घा वी
विच विच
रूह दे चरन नूँ
लोको!
रहण देओ...

ईश्वर

कितना खुश है
वो नन्हा
गर्भ की नींद के सपनों में मुस्कुराता,

भीतर के ब्रह्माण्ड का ईश्वर
बाहर की दुनिया का नवासा!