Sunday, September 10, 2017

क्यों कर?

मोड़ अमृत से मुँह
ज़हर का प्याला
उन्होंने उठाया क्यों कर?

वो कौन थे मुख़ातिब
दर ओ दरवेश
प्यासों ने पानी से मुँह
घुमाया क्यों कर?

रहने दे

बादशाह को बादशाह
दरवेश को दरवेश
रहने दे,

कोई विरला
हुआ जो दोनों,
ख़ुदा की कुदरत,

वर्ना सत्ता नशीन को
इतिहास तक रहने दे।

Saturday, September 9, 2017

ਡਾਂਗ

ਸੁਣੇਐ
ਸੌਂਦਾ ਵੀ
ਓ
ਅੱਜ ਕੱਲ ਹੈ
ਡਾਂਗ ਚੁੱਕ ਕੇ,

ਸੁਪਣੇ ਵਿਚ ਵੀ
ਰਹਿੰਦਾਂ ਏ
ਖ਼ਬਰਦਾਰ
ਆਪਣੇ ਹੀ
ਵਿਰੋਧ ਤੋਂ।

बच्चा

आज
ईश्वर को
मिट्टी में
खेलते हुए देखा,

तो अनायास
आसमान में बैठ
दुनिया की रेत से खेलते
बच्चे की
बहुत याद आई!

Saturday, September 2, 2017

राज़

पूछा
ज़माने ने
शाह ए अमीर की खड्ग से
जब
निडरता
निश्चय
कर्म
इंसाफ़ के
हौसले का
राज़,

चमकती
कृतार्थ
आँखों से चूम ली उसने
कमरबंद की वो दूसरी
ख़ामोश शमशीर
जो थी पीर ने बख़्शी!