बरसात
की सुबह,
स्कूल
के बाहर,
खुल
गयीं
रंग बिरंगी
तितलियों
सी
छतरियाँ,
फूल
से
बच्चों
पर
मंडराती
रहीं|
बरसात
की सुबह,
स्कूल
के बाहर,
खुल
गयीं
रंग बिरंगी
तितलियों
सी
छतरियाँ,
फूल
से
बच्चों
पर
मंडराती
रहीं|
अटक
गई
है
कहीं
ज़िन्दगी
की
सुई,
किसी
ग्रामोफ़ोन
की
तरह,
तरसता
है
दिल
रेडियो सी
आज़ादी,
तोड़ कर
चखने को,
हवा से,
उमंगों
के
स्टेशन।